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लेंडी बाग़ — बाबा का बगीचा और 100+ साल से जलता नंदा दीप

शिर्डी में एक बगीचा है — जहाँ बाबा ख़ुद अपने हाथों से पौधे सींचते थे। बहुत कम लोग वहाँ रुकते हैं। 🚩

ज़्यादातर भक्त शिर्डी आते हैं, दर्शन करते हैं, और लौट जाते हैं। पर समाधि मंदिर से कुछ ही क़दम पर एक जगह है — लेंडी बाग़ — जहाँ बाबा रोज़ दो बार जाते थे, पौधों को पानी देते थे, और घंटों शांति से बैठते थे।

🌳 बाबा का बगीचा

लेंडी बाग़ बाबा ने ख़ुद बनवाया और संभाला। हर सुबह और दोपहर वे यहाँ आते — कभी पौधे लगाने, कभी पानी देने, कभी बस नीम के पेड़ के नीचे बैठने।

लेंडी यात्रा
जब बाबा बाग़ में जाते, भक्तों का एक झुंड उनके पीछे चलता। पर एक नियम था — बाग़ के अंदर बाबा अकेले जाते थे। भक्त बाहर रुकते, इंतज़ार करते। यही “लेंडी यात्रा” कहलाती थी।

🪔 नंदा दीप — आज भी जलता है

बाग़ के बीच में बाबा ने अपने हाथों से एक दो फ़ीट गहरा गड्ढा खोदा। उसमें एक मिट्टी का दीपक रखा और उसे जलाया। यही नंदा दीप है।

100+ साल हो गए। यह दीप कभी नहीं बुझा। आज इसे संगमरमर के एक छोटे से मंदिर में, काँच के बक्से में रखकर सुरक्षित किया गया है। नीम और पीपल के दो पेड़ों के बीच यह दीप जलता रहता है।

🌿 अंदर क्या देखेंगे

जब आप लेंडी बाग़ जाते हैं, बाबा की हर निशानी वहाँ है:

बाबा का कुआँ
जिसे बाबा ने ख़ुद यहाँ खुदवाया — इसी से वे पानी पीते थे।
नंदा दीप
बाबा का अपने हाथों से जलाया मिट्टी का दीपक। 100+ साल से लगातार जल रहा है।
पीपल का पेड़
इस पर नवग्रह की मूर्तियाँ स्थापित हैं — एक छोटा मंदिर ही।
दत्त मंदिर
औडुम्बर पेड़ के नीचे संगमरमर की दत्तात्रेय मूर्ति।
श्याम सुंदर की समाधि
बाबा के प्रिय घोड़े की समाधि।
भक्तों की समाधियाँ
अब्दुल बाबा, तात्या कोटे पाटिल और भाऊ महाराज — बाबा के सबसे क़रीबी भक्त, यहीं विश्राम कर रहे हैं।

🙏 जब आप जाएँ

लेंडी बाग़ समाधि मंदिर से 5 मिनट की पैदल दूरी पर है। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। प्रवेश मुफ़्त है।

दर्शन के बाद यहाँ ज़रूर आइए। नंदा दीप के सामने कुछ पल बैठिए। बाबा यहाँ ख़ुद बैठते थे, चलते थे, पौधे सींचते थे। यह बगीचा बाबा की उपस्थिति का एक मौन प्रमाण है — ज़्यादातर भक्त इसे कभी नहीं देख पाते।

इसके लिए अलग चक्कर नहीं
लेंडी बाग़ समाधि मंदिर परिसर के ठीक बगल में है — दर्शन के बाद 5 मिनट पैदल। ज़्यादातर भक्त इसे सिर्फ़ इसलिए miss करते हैं क्योंकि उन्हें पता नहीं होता। बीच में संगमरमर का नंदा दीप मंदिर ढूँढिए।

क्या यह उपयोगी लगा? यात्रा की योजना बना रहे किसी अपने को भेजिए।

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🙏 ॐ साईं राम।

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