शिर्डी में एक बगीचा है — जहाँ बाबा ख़ुद अपने हाथों से पौधे सींचते थे। बहुत कम लोग वहाँ रुकते हैं। 🚩
ज़्यादातर भक्त शिर्डी आते हैं, दर्शन करते हैं, और लौट जाते हैं। पर समाधि मंदिर से कुछ ही क़दम पर एक जगह है — लेंडी बाग़ — जहाँ बाबा रोज़ दो बार जाते थे, पौधों को पानी देते थे, और घंटों शांति से बैठते थे।
🌳 बाबा का बगीचा
लेंडी बाग़ बाबा ने ख़ुद बनवाया और संभाला। हर सुबह और दोपहर वे यहाँ आते — कभी पौधे लगाने, कभी पानी देने, कभी बस नीम के पेड़ के नीचे बैठने।
🪔 नंदा दीप — आज भी जलता है
बाग़ के बीच में बाबा ने अपने हाथों से एक दो फ़ीट गहरा गड्ढा खोदा। उसमें एक मिट्टी का दीपक रखा और उसे जलाया। यही नंदा दीप है।
100+ साल हो गए। यह दीप कभी नहीं बुझा। आज इसे संगमरमर के एक छोटे से मंदिर में, काँच के बक्से में रखकर सुरक्षित किया गया है। नीम और पीपल के दो पेड़ों के बीच यह दीप जलता रहता है।
🌿 अंदर क्या देखेंगे
जब आप लेंडी बाग़ जाते हैं, बाबा की हर निशानी वहाँ है:
🙏 जब आप जाएँ
लेंडी बाग़ समाधि मंदिर से 5 मिनट की पैदल दूरी पर है। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। प्रवेश मुफ़्त है।
दर्शन के बाद यहाँ ज़रूर आइए। नंदा दीप के सामने कुछ पल बैठिए। बाबा यहाँ ख़ुद बैठते थे, चलते थे, पौधे सींचते थे। यह बगीचा बाबा की उपस्थिति का एक मौन प्रमाण है — ज़्यादातर भक्त इसे कभी नहीं देख पाते।
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🙏 ॐ साईं राम।
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