शिर्डी में एक नीम का पेड़ है — जहाँ से बाबा की पूरी कहानी शुरू हुई। बहुत कम लोग वहाँ रुकते हैं। 🚩
समाधि मंदिर परिसर में एक जगह है जिसे गुरुस्थान कहते हैं। यहीं वह नीम का पेड़ है जिसके नीचे, लगभग 1854 में, एक 16 साल का नौजवान पहली बार बैठा मिला था — गहरी तपस्या में।
🌳 गुरुस्थान क्यों ख़ास है
गुरुस्थान यानी — गुरु का स्थान। यह वह जगह है जहाँ बाबा शिर्डी में पहली बार दिखे।
यह स्थान मेरे गुरु से जुड़ा है।
— साईबाबा — गुरुस्थान के बारे में
🪔 यहाँ क्या है
आज गुरुस्थान पर वही नीम का पेड़ है। नीचे एक छोटा मंदिर है, जहाँ बाबा का चित्र, एक शिवलिंग और नंदी की मूर्ति है।
भक्त यहाँ अगरबत्ती जलाते हैं। मान्यता है कि यहाँ अगरबत्ती जलाने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं — और कई भक्त इसे सबसे शांत, सबसे पवित्र कोना मानते हैं।
✨ जब आप जाएँ
समाधि मंदिर के दर्शन के बाद, गुरुस्थान ज़रूर जाइए। यहाँ भीड़ कम होती है — कुछ पल यहाँ बैठकर बिताइए। यही वह जगह है जहाँ से सब कुछ शुरू हुआ — बाबा की वह यात्रा जो आज करोड़ों लोगों की श्रद्धा बन गई।
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🙏 ॐ साईं राम।