All articles
Guide4 मिनट पढ़ें·22 मई 2026

शिर्डी की गुरुवार रात की पालकी — चावड़ी की वह परंपरा जो ज़्यादातर भक्त miss कर देते हैं

बहुत से भक्त शिर्डी जाते हैं — दर्शन करते हैं, प्रसादालय में भोजन करते हैं, द्वारकामाई देखते हैं, और शाम तक लौट आते हैं। पर हर गुरुवार रात, ठीक 9:15 बजे, शिर्डी में एक ऐसी परंपरा होती है जो 100+ सालों से नहीं रुकी। और ज़्यादातर भक्त इसे miss कर जाते हैं। 🪔

🪔 क्या होता है

समाधि मंदिर से एक पालकी निकलती है। उसमें होते हैं — साईबाबा का पुराना चित्र, उनकी सटका (छड़ी), और उनकी चाँदी की पादुकाएँ। फूलों से सजी, राजसी छत्र के नीचे।

यह पालकी जाती है — समाधि मंदिर से द्वारकामाई होते हुए चावड़ी तक, और चावड़ी से वापस। ठीक वही रास्ता, जो बाबा ख़ुद चलते थे।

🏛️ यह परंपरा क्यों है

1910 से 1918 तक — बाबा भौतिक रूप से शिर्डी में थे, और वे एक दिन छोड़कर एक दिन द्वारकामाई में, और एक दिन चावड़ी में सोते थे।

जिस रात बाबा चावड़ी जाते थे — भक्त उन्हें पालकी में, ढोल-नगाड़ों के साथ, फूलों की वर्षा करते हुए ले जाते थे। यह उनके लिए राजा की तरह सम्मान था। बाबा शुरू में संकोच करते थे, पर भक्तों के प्रेम के सामने उन्होंने मान लिया।

1918 में बाबा के महासमाधि लेने के बाद, संस्थान ने तय किया — यह परंपरा कभी नहीं रुकेगी। और तब से — हर गुरुवार रात, बाबा का चित्र वही रास्ता तय करता है।

⏰ पूरा कार्यक्रम

रात 8:00 बजे · पालकी का शृंगार
समाधि मंदिर में बाबा का पुराना चित्र, सटका, और पादुकाएँ राजसी वस्त्र में सजाई जाती हैं।
रात 9:00 बजे · भजन
समाधि मंदिर के मुख्य हॉल में भजन और अभंग गाए जाते हैं।
रात 9:15 बजे · पालकी निकलती है
पालकी समाधि मंदिर से निकलती है। टात्या कोटे पाटिल के वंशज आज भी बाबा का चित्र अपने हाथों से उठाने का सम्मान रखते हैं।
रात 10:30 बजे · चावड़ी में शेज आरती
चावड़ी पहुँचकर शेज (रात की) आरती होती है।

📝 जाने से पहले

  • दर्शन मुफ़्त है — कोई पास नहीं चाहिए। गुरुवार रात क़रीब 8:30 बजे तक चावड़ी या द्वारकामाई के पास पहुँच जाइए।
  • गलियाँ संकरी हैं। अच्छी जगह चाहिए तो जल्दी पहुँचिए।
  • यह सुबह की काकड़ आरती जितना ही पवित्र है — तो अगर एक रात भी रुक सकते हैं, गुरुवार रात रुकिए।
अगर सिर्फ़ एक रात रुक सकते हैं
गुरुवार रात रुकिए। 9:15 बजे की पालकी और चावड़ी की शेज आरती — यह अनुभव दिन में लौट जाने वालों को कभी नहीं मिलता। और आप पैदल दूरी पर ही होंगे।

जो रास्ता बाबा चलते थे, उनका चित्र आज भी वही चलता है — हर गुरुवार, बिना नागा।

चावड़ी की पालकी

गुरुवार रात के लिए मंदिर के पैदल दूरी पर रुकना है? verified hotels — असली फ़ोटो, गेट तक की सही दूरी, कोई छुपा हुआ charge नहीं। सब TripSaffron पर।

शिर्डी में stays देखें →

🙏 ॐ साईं राम।