हम साईबाबा को शिर्डी से जानते हैं। पर एक सवाल जो हर भक्त के मन में आता है — बाबा शिर्डी आने से पहले कहाँ थे? उनका जन्म कहाँ हुआ? माता-पिता कौन थे?
और सबसे हैरान करने वाली बात — इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और बाबा ख़ुद यही चाहते थे। 🚩
🛕 जो हम जानते हैं
🤔 पर इससे पहले?
सत्चरित्र के चौथे अध्याय में साफ़ लिखा है — “किसी को बाबा के माता-पिता, जन्म, या जन्मस्थान के बारे में कुछ नहीं पता।”
लोगों ने बहुत बार पूछा। पर बाबा हमेशा टाल जाते — कभी अस्पष्ट जवाब, कभी पहेली जैसी बात। उनके लिए यह सवाल महत्वपूर्ण ही नहीं था। कुछ कहते हैं वे पाथरी गाँव (महाराष्ट्र) में जन्मे। कुछ कहते हैं तमिलनाडु में। कुछ मानते हैं कि बाबा जन्मे ही नहीं — वे दत्तात्रेय के अवतार के रूप में प्रकट हुए।
🕊️ बाबा ने क्यों छिपाया?
बाबा का संदेश इसी में छिपा है। जब किसी ने पूछा “आप कौन हैं, कहाँ से आए?” — बाबा का जवाब था कि यह शरीर, यह नाम, यह जन्मस्थान — सब परिवर्तनशील है। असली पहचान आत्मा की है।
शायद यही बाबा की सबसे बड़ी शिक्षा है — श्रद्धा और सबुरी रखो, बाक़ी सब अपने आप होता है।
यह शरीर, यह नाम, यह जन्मस्थान — सब बदल जाता है। श्रद्धा और सबुरी रखो; बाक़ी अपने आप होता है।
— साईबाबा का संदेश
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शिर्डी में stays देखें →🙏 ॐ साईं राम।