शिर्डी में एक जगह है जिसे बाबा ने द्वारकामाई नाम दिया — और इस नाम के पीछे की भावना बहुत प्यारी है, बहुत कम लोग ध्यान देते हैं। 🚩
द्वारकामाई वह जगह है जहाँ साईबाबा ने अपने जीवन के 60 साल बिताए — सोए, खाया, भक्तों से मिले, और महासमाधि तक यहीं रहे। यह उनका असली घर था।
🪔 “द्वारकामाई” नाम कैसे पड़ा
बाबा ने ख़ुद इसे यह नाम दिया।
बाबा का अपने भक्तों के लिए प्रेम — माँ के प्रेम जैसा था। और द्वारकामाई उस प्रेम का प्रतीक है।
🛕 द्वारकामाई में आज क्या देखेंगे
जब आप द्वारकामाई जाते हैं, बाबा की रोज़ की ज़िंदगी की हर निशानी वहाँ है:
यह तस्वीर मेरे बाद भी जीवित रहेगी।
— साईबाबा — जयकर की पेंटिंग के बारे में
🙏 जब आप जाएँ
द्वारकामाई समाधि मंदिर परिसर के अंदर ही है। दर्शन के बाद वहाँ ज़रूर जाइए, जल्दी मत कीजिए — कुछ पल बैठिए। जो दीवारें बाबा ने 60 साल देखीं, जो पत्थर पर बाबा बैठते थे, जो चक्की उन्होंने अपने हाथों से चलाई — सब वहाँ है।
बस मन को शांत रखकर देखिए — बाबा की उपस्थिति आज भी महसूस होती है।
बाबा के बारे में ऐसी ही और कहानियाँ चाहिए? कमेंट में बताइए।
🙏 ॐ साईं राम।